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लेखनी प्रतियोगिता -05-Jun-2022

वृक्ष ही आवरण 


प्रकृति दे रही है आवाज
आओ सपनों मेरी पुकार
स्वच्छ रखो मुझे सुन्दर तन दो
बस इतनी सी है मेरी गुहार

सब मिलकर हाथ बढ़ाओ
एक एक सब पेड़ लगाओ
ये पेड़ ही हैं धरा का श्रृंगार 
बस इतनी सी है मेरी गुहार

धूप का रुप होगा विकराल
कहाँ से लाएगा वृक्ष विशाल 
कोमल तन झुलस जाएगा
छाँव कहाँ से तू लाएगा

मत काटो पेड़ो को तुम
वृक्ष से ही धरा गुलज़ार 
वृक्ष से ही बादल सारे 
वृक्ष से ही मेघ घटा सारे

है वरदान ये सुन्दर आवरण 
क्यों मैला करते हो वातावरण 
प्रकृति को सुन्दर स्वच्छ बनाओ
बस इतनी सी है मेरी गुहार

श्वेता दूहन देशवाल मुरादाबाद उत्तर प्रदेश 

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10 Comments

Kaushalya Rani

08-Jun-2022 05:43 PM

Nice

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Milind salve

06-Jun-2022 06:58 PM

👏👌🙏🏻

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Sona shayari

06-Jun-2022 01:32 PM

Nice

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